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BSSC New Chairman Shobha Ohatkar: बिहार कर्मचारी चयन आयोग की कमान शोभा ओहटकर के हाथ, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता पर रहेगा फोकस

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Alam Ki Khabar: बिहार सरकार ने रिटायर्ड IPS अधिकारी शोभा ओहटकर को बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। जानिए उनकी नियुक्ति का महत्व, भर्ती परीक्षाओं पर इसका असर और पूरी रिपोर्ट।

पटना, 2 अगस्त। आलम की खबर: बिहार सरकार ने राज्य की भर्ती परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी शोभा ओहटकर को बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार उनकी नियुक्ति पदभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होगी। इसके साथ ही आयोग के अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी को इस जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है।

यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब बिहार के विभिन्न सरकारी विभागों में हजारों पदों पर भर्ती प्रक्रियाएं चल रही हैं और कई नई नियुक्तियों की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। ऐसे में सरकार का यह निर्णय आगामी भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

शोभा ओहटकर बिहार कैडर की 1990 बैच की आईपीएस अधिकारी रही हैं। अपने लंबे पुलिस सेवा काल में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उनकी पहचान एक अनुशासित, कड़े फैसले लेने वाली और कानून व्यवस्था के मामलों में सख्त अधिकारी के रूप में रही है। इसी कारण उन्हें आम लोगों के बीच 'हंटरवाली मैडम' और 'लेडी सिंघम' जैसे नामों से भी जाना जाता है।

उन्होंने 30 जून 2026 को बिहार गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन सेवा के महानिदेशक पद से सेवानिवृत्ति ली थी। सेवानिवृत्ति के कुछ ही समय बाद सरकार ने उन्हें नई जिम्मेदारी सौंपते हुए बिहार कर्मचारी चयन आयोग की कमान दे दी है।

अब आयोग के माध्यम से आयोजित होने वाली ग्रुप-सी श्रेणी की सभी प्रमुख भर्ती परीक्षाओं की निगरानी और संचालन उनकी देखरेख में होगा। पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक, परीक्षा में देरी और चयन प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के कारण आयोग लगातार चर्चा में रहा है। ऐसे में नई अध्यक्ष से उम्मीद की जा रही है कि भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तकनीकी रूप से मजबूत और समयबद्ध बनेगी।

प्रशासनिक हलकों का मानना है कि सरकार ने यह नियुक्ति केवल औपचारिक बदलाव के रूप में नहीं बल्कि भर्ती व्यवस्था में सुधार के उद्देश्य से की है। आने वाले महीनों में यदि आयोग लंबित परीक्षाओं और नई नियुक्तियों को तय समय पर पूरा कराने में सफल रहता है तो इसका सीधा लाभ लाखों अभ्यर्थियों को मिलेगा।

विशेष टिप्पणी

बिहार में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए यह नियुक्ति उम्मीद का संदेश लेकर आई है। भर्ती परीक्षाओं पर लगातार उठते सवालों के बीच सरकार ने ऐसे अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी है जिनकी पहचान सख्त प्रशासन और अनुशासन के लिए रही है। हालांकि असली परीक्षा अब आयोग की कार्यशैली होगी। यदि लंबित भर्तियां समय पर पूरी होती हैं, पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगती है और चयन प्रक्रिया पारदर्शी रहती है, तभी इस फैसले का वास्तविक प्रभाव दिखाई देगा।

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